स्टोर रूम के उस बंद दरवाज़े के पीछे आन्या की पूरी रात जागते हुए गुजरी। कबीर की नफरत ने उसे इस कदर जकड़ लिया था कि वह सच चाहकर भी नहीं कह पा रही थी। लेकिन उसे पता था कि हाथ पर हाथ धरकर बैठने का वक्त निकल चुका है।
सुबह की पहली किरण के साथ ही मुंशी ने दरवाज़ा खोला। "चलो, काम पर लगो। आज विमला मालकिन के लिए खास नाश्ता तैयार करना है," मुंशी ने तिरस्कार से कहा।
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