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नफरत की बेड़ियाँ

दादी की ज़िद के आगे कबीर ने घुटने टेक दिए थे, लेकिन उसके दिल में आन्या के लिए सिर्फ कड़वाहट थी। उसने आन्या के पिता, मिस्टर सहगल, के गिरते हुए बिज़नेस को बचाने का लालच देकर आन्या से शादी का प्रस्ताव रखा। अपनी फैमिली को बर्बादी से बचाने के लिए, आन्या ने भारी मन से हाँ कह दिया।

शादी के दिन, आन्या लाल जोड़े में किसी परी जैसी लग रही थी, लेकिन कबीर की नज़रों में वह सिर्फ एक "लालची सौदागर" थी।

शादी के ठीक एक दिन बाद, माया आन्या से मिलने उनके नए घर आई। आन्या उसे देखकर खुश थी, उसे लगा कि कम से कम उसकी सहेली उसके साथ है।

"आन्या, कबीर तुमसे बहुत नफरत करते हैं। तुम्हें यहाँ से भाग जाना चाहिए," माया ने सहानुभूति जताते हुए कहा।

"नहीं माया, मैं भागूँगी तो मेरे पिता बर्बाद हो जाएंगे। कबीर जी को गलतफहमी हुई है, मैं उसे दूर कर दूँगी," आन्या ने मासूमियत से जवाब दिया।

माया के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई। उसे पता था कि जब तक आन्या इस घर में है, वह कबीर की संपत्ति की मालकिन नहीं बन पाएगी। उसने अपनी सबसे बड़ी चाल चलने का फैसला किया।

"मौत" का ड्रामा और झूठा इल्ज़ाम

उस शाम, माया ने आन्या को छत पर बुलाया। कबीर ऑफिस से लौट रहा था और उसकी गाड़ी हवेली के आँगन में दाखिल हो रही थी।

"आन्या, देखो नीचे कबीर आ गए!" माया चिल्लाई।

जैसे ही आन्या छत की मुंडेर के पास पहुँची, माया ने अचानक अपना संतुलन बिगाड़ा और चिल्लाने लगी, "आन्या! मुझे धक्का मत दो! मैं मर जाऊंगी! प्लीज मुझे मत मारो!"

आन्या हक्की-बक्की रह गई। "माया! तुम ये क्या कह रही हो? पीछे हटो!"

कबीर ने जैसे ही ऊपर देखा, उसे लगा कि आन्या, माया को धक्का दे रही है। अगले ही पल, माया नीचे बने स्विमिंग पूल के पास लगे ऊंचे पत्थरों के पीछे गिर गई

कबीर पागलों की तरह अंदर भागा। "माया!!"

जब वह वहां पहुँचा, माया गायब थी। वहां सिर्फ खून के धब्बे और माया का फटा हुआ दुपट्टा था, जो पानी में तैर रहा था।

कबीर वापस कमरे में आया। उसकी आँखों में खून उतर आया था। उसने आन्या की कलाई इतनी ज़ोर से पकड़ी कि उसकी चूड़ियाँ टूटकर उसकी खाल में चुभ गईं।

"तुमने उसे मार दिया! मेरी जान बचाने वाली लड़की को तुमने सिर्फ इसलिए मार दिया क्योंकि तुम्हें डर था कि वह मेरा सच बता देगी?" कबीर दहाड़ा।

"कबीर जी, मेरी बात सुनिए! मैंने कुछ नहीं किया! वह खुद... वह नाटक कर रही थी!" आन्या रोते हुए चिल्लाई।

"खामोश!" कबीर ने उसे धक्का देकर फर्श पर गिरा दिया। "तुम जैसी औरत की जगह जेल में होनी चाहिए, लेकिन नहीं... जेल तो तुम्हारे लिए बहुत आसान सज़ा होगी। मैं तुम्हें इसी घर में रखूँगा, अपनी पत्नी बनाकर, और हर दिन तुम्हें मौत से बदतर ज़िंदगी दूँगा।"

तबाही की शुरुआत

उसी रात, कबीर ने एक फोन कॉल किया। "मिस्टर सहगल के बिज़नेस के सारे इन्वेस्टर्स को पीछे हटने के लिए कहो। मैं चाहता हूँ कि कल सुबह तक उनकी कंपनी सड़क पर आ जाए।"

आन्या ने खिड़की के पास खड़े होकर यह सुना। उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

"नहीं कबीर! मेरे पापा ने कुछ नहीं किया! प्लीज उन्हें छोड़ दीजिए!" वह उसके पैरों में गिर गई।

कबीर ने घृणा से उसे देखा और अपना पैर पीछे खींच लिया। "ये तो बस शुरुआत है, आन्या। तुमने मुझसे मेरी दादी की रक्षक को छीना है, मैं तुमसे तुम्हारी पूरी दुनिया छीन लूँगा।"

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